पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को एक कड़ा पत्र लिखा है। उन्होंने मतदाता सूची के इस विशेष पुनरीक्षण में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियों और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की है। ममता ने चेतावनी दी कि यदि गड़बड़ियों को ठीक नहीं किया गया तो इससे बड़े पैमाने पर योग्य मतदाताओं के मताधिकार का हनन हो सकता है, जो भारतीय लोकतंत्र की नींव को “अपूरणीय क्षति” पहुंचा सकता है।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि एसआईआर प्रक्रिया अत्यधिक जल्दबाजी में शुरू की गई है और इसके लिए न तो पर्याप्त तैयारी की गई और न ही जमीनी स्तर पर आवश्यक प्रशिक्षण सुनिश्चित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली में खामियां हैं, दिशा-निर्देश असंगत हैं और इस महत्वपूर्ण कार्य में लगे अधिकारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला है। इन कारणों से पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से सूची से हटने का खतरा बढ़ गया है।
ममता बनर्जी ने आशंका जताई कि मौजूदा हालात में एसआईआर जारी रहने से लाखों मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक शासन के मूल सिद्धांतों पर सीधा हमला बताया। मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि या तो तत्काल प्रभाव से इन खामियों को दूर किया जाए, या फिर प्रक्रिया को रोक दिया जाए, ताकि किसी भी तरह की लोकतांत्रिक क्षति से बचा जा सके।
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राजनीतिक हलकों में ममता के इस पत्र को लेकर हलचल तेज है। विपक्षी दल जहां एसआईआर को जरूरी सुधारात्मक प्रक्रिया बता रहे हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे सत्ताधारी दलों द्वारा मतदाता सूची में कथित हेरफेर का प्रयास करार दे रही है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग इस पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
